देश की सरकारें अपने अपने हिसाब से जनता का भला सोचती है लेकिन जनता का भला किस में है उससे पूछने नहीं जाती ।शायद इसीलिए सही मायने में जनता का भला होने की जगह उसका बुरा होता है वह परेशान होती है और आखिरकार 5 साल बाद सरकार बदल देती है. राजस्थान में भी यही परिपाटी चल रही है जब भी कांग्रेस की सरकार आती है शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाना उसके लिए एक आवश्यक सी प्रक्रिया मानी जाती है ताकि खाद्य पदार्थ बेचने वाले और बनाने वाले से आने वाली रिश्वत और चौथ वसूली की राशि बढ़ाई जा सके पिछली सरकार में तो ऐसे मंत्री ठेका लेते थे जिनका फूड सैंपलिंग से कोई लेना-देना नहीं था ।वे थे तो खाद्य विभाग के खाद्य मंत्री जिनके जिम्मे राशन की दुकानें आती थी लेकिन उन्होंने भी तेल ,घी ,मसाले ,आटा ,दाल ,चावल की फैक्ट्रियों का ठेका ले लिया और तथाकथित शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चला दिया हालांकि उन्हें बद्ददुआएं भी झेलनी पड़ी और दुष्कर्म के आरोप में कई साल जेल में भी पड़े रहे लेकिन जब सरकारी अधिकारियों को खून मुंह लग जाए तो वह खून की अंतिम बूंद तक किसी के शरीर में नहीं छोड़ना चाहते राजस्थान की वर्तमान गहलोत सरकार भी द...