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राजस्थान के मिलावटी उद्योगपति


ताड़केश्वर एग्रो फूड्स घटिया खाद्य पदार्थों का बादशाह
जिसे जेल में होना चाहिए आज भी चला रहे हैं फैक्ट्री सब स्टैंडर्ड सामान बनाने वालों को 10 साल जेल के प्रावधान
हमारा देश भी एक अजीब मानसिकता के साथ जी रहा है एक तरफ हर व्यक्ति शुद्ध खाने की और स्वस्थ रहने की बात करता है वही उसका पड़ोसी अपने घर वालों के लिए सुख सुविधाएं जुटाने के लिए ऐसा माल भी बनाता है जो किसी की लीवर और किडनी को फेल कर देते हैं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं कहने के लिए भारत सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 बना दिया लेकिन यह कानून बनने के 14 साल बाद भी लोग केवल जुर्माना देकर छूट रहे हैं 1 दिन के लिए भी फैक्ट्री बंद नहीं होती सैंपल लेने वाले इसलिए डरे हुए हैं की मिलावट करने वाले उद्योगपतियों की पहुंच राजनेताओं तक है ऐसे में दोषी व्यापारी को कहे, या जनता को, फूड सेफ्टी ऑफिसर को कहें या उस कानून की पालना नहीं करने वाले ज्यूडिशरी को। लेकिन नुकसान इन सभी को हो रहा है और सब दूसरे को परेशान देखकर खुश हो रहे हैं
ऐसा ही एक वाकया जयपुर में भी देखने को मिल रहा है जहां एक उद्योगपति 7 से अधिक पाम आयल की प्रोसेसिंग व पैकिंग करता है और अलग-अलग जिलों में यह ना सिर्फ फेल होते हैं बल्कि अमानक भी घोषित किए जाते हैं अर्थात जो उत्पादन खाने के लिए नहीं हैं और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट में जिसमें 10 साल, 20 साल सजा के प्रावधान है इस ताड़केश्वर एग्रोफूड के बनाए हुए प्रोडक्ट बिलोवणा टोंक में सब्सटेंडर्ड घोषित हुआ दूसरा प्रोडक्ट अर्पण टोंक में सब स्टैंडर्ड ,जैसलमेर में दो बार सैंपल लिए दोनों बार सब स्टेंडर्ड आए गंगानगर में सब स्टैंडर्ड के साथ मिस ब्रांड भी घोषित किए गए इसी कंपनी का उत्सव ब्रांड टोंक राजसमंद झुंझुनू आदि में भी सब स्टैंडर्ड और अपमिश्रण घोषित किए गए इस उद्योगपति से बात की तो इसका कहना था कि हमारे कोई प्रोडक्ट सब्सटेंडर्ड नहीं आते केवल मिस ब्रांड आते हैं और वह भी अब हमने सुधार कर लिया है मिस ब्रांड भी नहीं आएंगे अर्थात अपने फार्मूले पैकिंग में इस तरह का काम कर दिया कि फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड एक्ट भी फेल हो जाएगा लेकिन यहां इनकी यह बात भी झूठी साबित हो जाती है कि उसके प्रोडक्ट सब्सटेंडर्ड नहीं आते क्योंकि फैक्ट्री से ही उठाए हुए केदावत ब्रांड के पाम आयल जयपुर के लेबोरेटरी में ही सब स्टेंडर्ड आए यही ब्रांड टोक में भी फेल हुआ ऐसे में इतने ढेर सारे घटिया पाम ऑयल बनाने वाले इस उद्योगपति पर कानून का शिकंजा कब कसेगा यह तो कानून ही जाने या उसे लागू करने वाले लेकिन हम पत्रकारिता नियम का पालन करते हुए आप सभी के पास समाज की वास्तविकता पहुंचा रहे हैं यह सभी आंकड़े मन से बनाए हुए नहीं हैं बल्कि विभिन्न जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं फूड सेफ्टी ऑफीसरों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित किया गया है अब सोचना उन दुकानदारों को है जो इनके प्रोडक्ट की डीलरशिप लेकर भोली भाली जनता को माल बेचते हैं इन डीलर्स को यह पता नहीं है कि फूड सेफ्ट सेफ्टी एक्ट में जेल जाने के लिए उनके लिए भी प्रावधान है

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