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जनता का गुस्सा गलत लोगों पर निकलता है

मीडिया के हम गुलाम हो गए हैं जबकि कुछ लोग कहते हैं कि हमें राजनेताओं ने गुलाम बनाया है मैं यहां सहमत भी हूं और असहमत भी। देश में आए दिन अखबार या न्यूज़ चैनलों में नए नए घोटाले पब्लिश होते हैं और तथाकथित मीडिया चिल्लाकर कहता है हमने एक खुलासा कर दिया उस खुलासा का जनता पर असर ऐसा होता है कि सारे नेता भ्रष्ट हैं और इस देश में ऐसा ही चलेगा मीडिया भी उन घोटालों के पीछे संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री से बयान लेना चाहते हैं और इस बयानबाजी से आवाम के अंदर यह संदेश जाता है की यह राजनेता या यह पार्टी भ्रष्ट है और हमें इन्हें बदलना है और मीडिया से यह संदेश लेकर जनता सत्ता का परिवर्तन कर भी देती है लेकिन जब दूसरे लोग सत्ता में आते हैं दूसरी पार्टी सरकार बनाती हैं तो घोटालों के मुख्य अभियुक्त यानी सरकारी अधिकारी ,आईएएस जैसे लोग वापस नई पार्टी के साथ मिलकर ,उन्हें सेट करते हैं ।और फिर से एक नए घोटाले को अंजाम देने में लग जाते हैं क्योंकि देश की व्यवस्था के अंदर राजनेताओं को शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं है उनके लिए कोई ऐसी परीक्षा भी नहीं है जिससे उन्हें प्रोफेशनल ज्ञान हो उन्हें सिर्फ वोट लेने के अलावा और कोई बुद्धि नहीं होती और वोट अपने आपके अंदर ज्ञान नहीं बल्कि एक रणनीति है जो कोई भी समझदार आदमी प्रयोग कर सकता है
यह एक बात और समझने की है कि हम यानी जनता सत्ता तो परिवर्तित कर देते हैं लेकिन संबंधित अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त नहीं करवाते यहां तक कि कई मामलों में तो उन्हें चार्जशीट भी नहीं मिलती और सस्पेंड भी नहीं होते । यदि गलती से हो जाए तो 6 माह के अंदर अंदर वापस बहाल भी हो जाते हैं। हमें यह समझना होगा कि भ्रष्टाचार कभी भी अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता उसके लिए दूसरे का साथ आवश्यक है और राजनेताओं के साथ यह दूसरा व्यक्ति वह नौकरशाह है जो अपने फायदे , अपनी पोस्टिंग के लिए राजनेताओं के तलवे चाटते रहता है और उन्हें नए-नए कमाई के रास्ते बताता रहता है साथ ही कई बार इतनी संपत्ति किसी राजनेता के पास भी नहीं होती जितनी संपत्ति कई विभागों के क्लर्क के पास होती है क्योंकि ना जाने उन्होंने कितने राजनेताओं को बेवकूफ बना बना कर पिछले 40 वर्षों में अकूत संपत्ति बनाई है क्योंकि नेता हर 5 साल में बदले जा सकते हैं लेकिन नौकरशाह नहीं अब समय आ गया है हमें सब तरफ से सोचना होगा यदि हमें चैन से जीना है राजनेताओं पर ही नहीं नौकरशाहों पर भी सवाल उठाने होंगे 

जय हिंद वंदे मातरम

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