किसी भी व्यक्ति के आगे बढ़ने या पीछे जाने के पीछे मतलब वह उन्नति कर रहा है या वह बर्बाद हो रहा है यह सब तय करने के लिए बड़े बुजुर्ग और बुद्धिजीवी कहते हैं कि आदमी की संगत कैसी होगी वह वैसा ही बनेगा अब यह संगत कहां से आएगी संगत का तात्पर्य तो यही है कि जो आपके आसपास लोग रहते हैं वही आपके संगत है अब जब हम हिंदुस्तान की वर्तमान दशा और दिशा की बात करेंगे तो यहां एक तो पूंजी वाले लोग हैं अमीर लोग हैं और फिर बच्चे कुछ गरीब है मध्यमवर्गीय में लगभग नहीं आते ऐसा मैं मानता हूं क्योंकि मध्यमवर्गीय वर्ग केवल सरकारी आय के हिसाब से ही है लेकिन जो किसी से भी डरे जिसे कोई भी डरा सके और जो हमेशा अपने और अपने परिवार का पेट पालता हो सरकारों से मध्यमवर्गीय कह सकती है लेकिन मेरे हिसाब से वह गरीब ही होगा देश में यही 2 वर्ग है अब कई बार मैंने विचार किया की हमें उन्नति करना है या हमें राजनीति को दिशा देनी है या हमें आवाम के लिए कुछ काम करना है तो मैंने कोशिश की अपनी विचारधारा के साथ किसी से बात भी की जाए ताकि हम आंकलन कर सकें जो हम सोच रहे हैं वह सही है या नहीं लेकिन यह सब कुछ करने पर मैंने पाया कि जिसके...