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Showing posts from December, 2020

जनता का गुस्सा गलत लोगों पर निकलता है

मीडिया के हम गुलाम हो गए हैं जबकि कुछ लोग कहते हैं कि हमें राजनेताओं ने गुलाम बनाया है मैं यहां सहमत भी हूं और असहमत भी। देश में आए दिन अखबार या न्यूज़ चैनलों में नए नए घोटाले पब्लिश होते हैं और तथाकथित मीडिया चिल्लाकर कहता है हमने एक खुलासा कर दिया उस खुलासा का जनता पर असर ऐसा होता है कि सारे नेता भ्रष्ट हैं और इस देश में ऐसा ही चलेगा मीडिया भी उन घोटालों के पीछे संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री से बयान लेना चाहते हैं और इस बयानबाजी से आवाम के अंदर यह संदेश जाता है की यह राजनेता या यह पार्टी भ्रष्ट है और हमें इन्हें बदलना है और मीडिया से यह संदेश लेकर जनता सत्ता का परिवर्तन कर भी देती है लेकिन जब दूसरे लोग सत्ता में आते हैं दूसरी पार्टी सरकार बनाती हैं तो घोटालों के मुख्य अभियुक्त यानी सरकारी अधिकारी ,आईएएस जैसे लोग वापस नई पार्टी के साथ मिलकर ,उन्हें सेट करते हैं ।और फिर से एक नए घोटाले को अंजाम देने में लग जाते हैं क्योंकि देश की व्यवस्था के अंदर राजनेताओं को शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं है उनके लिए कोई ऐसी परीक्षा भी नहीं है जिससे उन्हें प्रोफेशनल ज्ञान हो उन्हें सिर्फ वोट लेने के...

असुरक्षित जनता उनकी वजह से मजबूत नेता

यह एक विडंबना ही कहिए कि देश का लगभग हर व्यक्ति अपने आप को असुरक्षित समझता है कहीं ना कहीं अंतर्मन से हताश और निराश भी है और जब भी कोई व्यक्ति इस अवस्था में होता है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष संरक्षक ढूंढते हैं और इन हताश निराश दबे कुचले लोगों को राजनीतिज्ञ लोग संरक्षक महसूस होते हैं और शायद इसीलिए आम जनता अलग-अलग स्तर के राजनेताओं की चापलूसी कर उसके नजदीक रहना चाहती है कुछ लोग इसे स्वार्थ बोलते हैं लेकिन ऐसी जनता को स्वार्थी कहना उनके साथ अन्याय है यदि समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग जनता को नाकारा और निकम्मा समझते हैं तो वह शायद इसलिए क्योंकि बुद्धिजीवी लोगों के पेट में रोटी है और बोलने के लिए जबान है कहीं ना कहीं तर्कशक्ति भी होगी जिससे वे स्वयं को सुरक्षित कर पाते हैं और जो वैसे हम सुरक्षित हैं तो उन्हें किसी की चमचागिरी की आवश्यकता भी महसूस नहीं होती चमचागिरी हम भक्तों को भी कह सकते हैं और अ भक्तों को भी। लेकिन यह तमाम बुद्धिजीवी लोग मिलकर अपने सारे घोड़े खोल कर भी देश की जनता के अंदर सुरक्षा का भाव नहीं दे पाते और जब भी किसी स्थान पर इन्हें मंच मिले तो बोलते देखते हैं कि जनता एक स...