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दिमाग से दिवालिया लोगों की सलाह ना लें

किसी भी व्यक्ति के आगे बढ़ने या पीछे जाने के पीछे मतलब वह उन्नति कर रहा है या वह बर्बाद हो रहा है यह सब तय करने के लिए बड़े बुजुर्ग और बुद्धिजीवी कहते हैं कि आदमी की संगत कैसी होगी वह वैसा ही बनेगा अब यह संगत कहां से आएगी संगत का तात्पर्य तो यही है कि जो आपके आसपास लोग रहते हैं वही आपके संगत है अब जब हम हिंदुस्तान की वर्तमान दशा और दिशा की बात करेंगे तो यहां एक तो पूंजी वाले लोग हैं अमीर लोग हैं और फिर बच्चे कुछ गरीब है मध्यमवर्गीय में लगभग नहीं आते ऐसा मैं मानता हूं क्योंकि मध्यमवर्गीय वर्ग केवल सरकारी आय के हिसाब से ही है लेकिन जो किसी से भी डरे जिसे कोई भी डरा सके और जो हमेशा अपने और अपने परिवार का पेट पालता हो सरकारों से मध्यमवर्गीय कह सकती है लेकिन मेरे हिसाब से वह गरीब ही होगा  देश में यही 2 वर्ग है अब कई बार मैंने विचार किया की हमें उन्नति करना है या हमें राजनीति को दिशा देनी है या हमें आवाम के लिए कुछ काम करना है तो मैंने कोशिश की अपनी विचारधारा के साथ किसी से बात भी की जाए ताकि हम आंकलन कर सकें जो हम सोच रहे हैं वह सही है या नहीं लेकिन यह सब कुछ करने पर मैंने पाया कि जिसके...

राजस्थान के मिलावटी उद्योगपति

ताड़केश्वर एग्रो फूड्स घटिया खाद्य पदार्थों का बादशाह जिसे जेल में होना चाहिए आज भी चला रहे हैं फैक्ट्री सब स्टैंडर्ड सामान बनाने वालों को 10 साल जेल के प्रावधान हमारा देश भी एक अजीब मानसिकता के साथ जी रहा है एक तरफ हर व्यक्ति शुद्ध खाने की और स्वस्थ रहने की बात करता है वही उसका पड़ोसी अपने घर वालों के लिए सुख सुविधाएं जुटाने के लिए ऐसा माल भी बनाता है जो किसी की लीवर और किडनी को फेल कर देते हैं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं कहने के लिए भारत सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 बना दिया लेकिन यह कानून बनने के 14 साल बाद भी लोग केवल जुर्माना देकर छूट रहे हैं 1 दिन के लिए भी फैक्ट्री बंद नहीं होती सैंपल लेने वाले इसलिए डरे हुए हैं की मिलावट करने वाले उद्योगपतियों की पहुंच राजनेताओं तक है ऐसे में दोषी व्यापारी को कहे, या जनता को, फूड सेफ्टी ऑफिसर को कहें या उस कानून की पालना नहीं करने वाले ज्यूडिशरी को। लेकिन नुकसान इन सभी को हो रहा है और सब दूसरे को परेशान देखकर खुश हो रहे हैं ऐसा ही एक वाकया जयपुर में भी देखने को मिल रहा है जहां एक उद्योगपति 7 से अधिक पाम आयल की प्...

जनता की फर्जी औकात

 देश की सरकारें अपने अपने हिसाब से जनता का भला सोचती है लेकिन जनता का भला किस में है उससे पूछने नहीं जाती ।शायद इसीलिए सही मायने में जनता का भला होने की जगह उसका बुरा होता है वह परेशान होती है और आखिरकार 5 साल बाद सरकार बदल देती है. राजस्थान में भी यही परिपाटी चल रही है जब भी कांग्रेस की सरकार आती है शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाना उसके लिए एक आवश्यक सी प्रक्रिया मानी जाती है ताकि खाद्य पदार्थ बेचने वाले और बनाने वाले से आने वाली रिश्वत और चौथ वसूली की राशि बढ़ाई जा सके पिछली सरकार में तो ऐसे मंत्री ठेका लेते थे जिनका फूड सैंपलिंग से कोई लेना-देना नहीं था ।वे थे तो खाद्य विभाग के खाद्य मंत्री जिनके जिम्मे राशन की दुकानें आती थी लेकिन उन्होंने भी तेल ,घी ,मसाले ,आटा ,दाल ,चावल की फैक्ट्रियों का ठेका ले लिया और तथाकथित शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चला दिया हालांकि उन्हें बद्ददुआएं भी झेलनी पड़ी और दुष्कर्म के आरोप में कई साल जेल में भी पड़े रहे लेकिन जब सरकारी अधिकारियों को खून मुंह लग जाए तो वह खून की अंतिम बूंद तक किसी के शरीर में नहीं छोड़ना चाहते राजस्थान की वर्तमान गहलोत सरकार भी द...