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जनता का गुस्सा गलत लोगों पर निकलता है

मीडिया के हम गुलाम हो गए हैं जबकि कुछ लोग कहते हैं कि हमें राजनेताओं ने गुलाम बनाया है मैं यहां सहमत भी हूं और असहमत भी। देश में आए दिन अखबार या न्यूज़ चैनलों में नए नए घोटाले पब्लिश होते हैं और तथाकथित मीडिया चिल्लाकर कहता है हमने एक खुलासा कर दिया उस खुलासा का जनता पर असर ऐसा होता है कि सारे नेता भ्रष्ट हैं और इस देश में ऐसा ही चलेगा मीडिया भी उन घोटालों के पीछे संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री से बयान लेना चाहते हैं और इस बयानबाजी से आवाम के अंदर यह संदेश जाता है की यह राजनेता या यह पार्टी भ्रष्ट है और हमें इन्हें बदलना है और मीडिया से यह संदेश लेकर जनता सत्ता का परिवर्तन कर भी देती है लेकिन जब दूसरे लोग सत्ता में आते हैं दूसरी पार्टी सरकार बनाती हैं तो घोटालों के मुख्य अभियुक्त यानी सरकारी अधिकारी ,आईएएस जैसे लोग वापस नई पार्टी के साथ मिलकर ,उन्हें सेट करते हैं ।और फिर से एक नए घोटाले को अंजाम देने में लग जाते हैं क्योंकि देश की व्यवस्था के अंदर राजनेताओं को शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं है उनके लिए कोई ऐसी परीक्षा भी नहीं है जिससे उन्हें प्रोफेशनल ज्ञान हो उन्हें सिर्फ वोट लेने के...
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असुरक्षित जनता उनकी वजह से मजबूत नेता

यह एक विडंबना ही कहिए कि देश का लगभग हर व्यक्ति अपने आप को असुरक्षित समझता है कहीं ना कहीं अंतर्मन से हताश और निराश भी है और जब भी कोई व्यक्ति इस अवस्था में होता है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष संरक्षक ढूंढते हैं और इन हताश निराश दबे कुचले लोगों को राजनीतिज्ञ लोग संरक्षक महसूस होते हैं और शायद इसीलिए आम जनता अलग-अलग स्तर के राजनेताओं की चापलूसी कर उसके नजदीक रहना चाहती है कुछ लोग इसे स्वार्थ बोलते हैं लेकिन ऐसी जनता को स्वार्थी कहना उनके साथ अन्याय है यदि समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग जनता को नाकारा और निकम्मा समझते हैं तो वह शायद इसलिए क्योंकि बुद्धिजीवी लोगों के पेट में रोटी है और बोलने के लिए जबान है कहीं ना कहीं तर्कशक्ति भी होगी जिससे वे स्वयं को सुरक्षित कर पाते हैं और जो वैसे हम सुरक्षित हैं तो उन्हें किसी की चमचागिरी की आवश्यकता भी महसूस नहीं होती चमचागिरी हम भक्तों को भी कह सकते हैं और अ भक्तों को भी। लेकिन यह तमाम बुद्धिजीवी लोग मिलकर अपने सारे घोड़े खोल कर भी देश की जनता के अंदर सुरक्षा का भाव नहीं दे पाते और जब भी किसी स्थान पर इन्हें मंच मिले तो बोलते देखते हैं कि जनता एक स...

दिमाग से दिवालिया लोगों की सलाह ना लें

किसी भी व्यक्ति के आगे बढ़ने या पीछे जाने के पीछे मतलब वह उन्नति कर रहा है या वह बर्बाद हो रहा है यह सब तय करने के लिए बड़े बुजुर्ग और बुद्धिजीवी कहते हैं कि आदमी की संगत कैसी होगी वह वैसा ही बनेगा अब यह संगत कहां से आएगी संगत का तात्पर्य तो यही है कि जो आपके आसपास लोग रहते हैं वही आपके संगत है अब जब हम हिंदुस्तान की वर्तमान दशा और दिशा की बात करेंगे तो यहां एक तो पूंजी वाले लोग हैं अमीर लोग हैं और फिर बच्चे कुछ गरीब है मध्यमवर्गीय में लगभग नहीं आते ऐसा मैं मानता हूं क्योंकि मध्यमवर्गीय वर्ग केवल सरकारी आय के हिसाब से ही है लेकिन जो किसी से भी डरे जिसे कोई भी डरा सके और जो हमेशा अपने और अपने परिवार का पेट पालता हो सरकारों से मध्यमवर्गीय कह सकती है लेकिन मेरे हिसाब से वह गरीब ही होगा  देश में यही 2 वर्ग है अब कई बार मैंने विचार किया की हमें उन्नति करना है या हमें राजनीति को दिशा देनी है या हमें आवाम के लिए कुछ काम करना है तो मैंने कोशिश की अपनी विचारधारा के साथ किसी से बात भी की जाए ताकि हम आंकलन कर सकें जो हम सोच रहे हैं वह सही है या नहीं लेकिन यह सब कुछ करने पर मैंने पाया कि जिसके...

राजस्थान के मिलावटी उद्योगपति

ताड़केश्वर एग्रो फूड्स घटिया खाद्य पदार्थों का बादशाह जिसे जेल में होना चाहिए आज भी चला रहे हैं फैक्ट्री सब स्टैंडर्ड सामान बनाने वालों को 10 साल जेल के प्रावधान हमारा देश भी एक अजीब मानसिकता के साथ जी रहा है एक तरफ हर व्यक्ति शुद्ध खाने की और स्वस्थ रहने की बात करता है वही उसका पड़ोसी अपने घर वालों के लिए सुख सुविधाएं जुटाने के लिए ऐसा माल भी बनाता है जो किसी की लीवर और किडनी को फेल कर देते हैं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं कहने के लिए भारत सरकार ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 बना दिया लेकिन यह कानून बनने के 14 साल बाद भी लोग केवल जुर्माना देकर छूट रहे हैं 1 दिन के लिए भी फैक्ट्री बंद नहीं होती सैंपल लेने वाले इसलिए डरे हुए हैं की मिलावट करने वाले उद्योगपतियों की पहुंच राजनेताओं तक है ऐसे में दोषी व्यापारी को कहे, या जनता को, फूड सेफ्टी ऑफिसर को कहें या उस कानून की पालना नहीं करने वाले ज्यूडिशरी को। लेकिन नुकसान इन सभी को हो रहा है और सब दूसरे को परेशान देखकर खुश हो रहे हैं ऐसा ही एक वाकया जयपुर में भी देखने को मिल रहा है जहां एक उद्योगपति 7 से अधिक पाम आयल की प्...

जनता की फर्जी औकात

 देश की सरकारें अपने अपने हिसाब से जनता का भला सोचती है लेकिन जनता का भला किस में है उससे पूछने नहीं जाती ।शायद इसीलिए सही मायने में जनता का भला होने की जगह उसका बुरा होता है वह परेशान होती है और आखिरकार 5 साल बाद सरकार बदल देती है. राजस्थान में भी यही परिपाटी चल रही है जब भी कांग्रेस की सरकार आती है शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाना उसके लिए एक आवश्यक सी प्रक्रिया मानी जाती है ताकि खाद्य पदार्थ बेचने वाले और बनाने वाले से आने वाली रिश्वत और चौथ वसूली की राशि बढ़ाई जा सके पिछली सरकार में तो ऐसे मंत्री ठेका लेते थे जिनका फूड सैंपलिंग से कोई लेना-देना नहीं था ।वे थे तो खाद्य विभाग के खाद्य मंत्री जिनके जिम्मे राशन की दुकानें आती थी लेकिन उन्होंने भी तेल ,घी ,मसाले ,आटा ,दाल ,चावल की फैक्ट्रियों का ठेका ले लिया और तथाकथित शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चला दिया हालांकि उन्हें बद्ददुआएं भी झेलनी पड़ी और दुष्कर्म के आरोप में कई साल जेल में भी पड़े रहे लेकिन जब सरकारी अधिकारियों को खून मुंह लग जाए तो वह खून की अंतिम बूंद तक किसी के शरीर में नहीं छोड़ना चाहते राजस्थान की वर्तमान गहलोत सरकार भी द...